गृहस्थ जीवन और सदाचार नियम का पालन करना
गृहस्थ जीवन और सदाचार नियम का पालन करना। प्रत्येक व्यक्ति को गृहस्थ जीवन का पालन अवश्य ही करना चाहिए।साधु और साधु वही हो सकता है जिसका दोष न हो।1.
सर्वप्रथम गृहस्थ व्यक्ति को ब्रह्म मुहूर्त में बिस्तर पर से उठ जाना चाहिए।
2. सर्वप्रथम धरती को स्पर्श कर प्रणाम करना चाहिए।
3.उसके बाद अपने हाथों को खोलकर उसके दर्शन करने चाहिए।देवी लक्ष्मी,सरस्वती और श्रीहरि वास करते हैं।4.फिर धरती माता का हाथ जोड़कर प्रणाम करना चाहिए।
5.उसके बाद थोड़ा चल कर मूत्र त्याग,शौच और लघुशंका आदि से निर्वित होने चाहिए।कभी नदी,मन्दिर, तीर्थ स्थल और पेड़ के नीचे , श्मशान घाट की भूमि पर मलमूत्र और शौच का त्याग नही करना चाहिए।निरोगी काया रखने के दिन में मुख के उत्तर दिशा और रात्रि में दक्षिण दिशा में मुख करके मूत्र त्याग नही करना चाहिए।उसके बाद हाथों को साफ करना चाहिए।तीन बार कुल्ला करना ,मुँह धोये और पैर को भी धोना चाहिए।
6शुद्ध जल में स्नान करना चाहिए। उसके शुद्ध वस्त्र धारण करने के बाद अपने पितरों को और सूर्य देव को जल तर्पण करे। उसके बाद अपने पूजा घर या मंदिर में जा पूजा अर्चना एवं ध्यान करना चाहिए।
7.उसके बाद अपने घर में वृद्ध महिला पुरुषों के चरण स्पर्श करना चाहिए, उनका आशीर्वाद लेना चाहिए।
8.भोजनालय में भोजन बनते समय प्रथम रोटी गाय, दूसरी में आधी रोटी कौवे को और कुत्ता को देनी चाहिए।रोटी के अंदर चीनी या गुड़ रखना चाहिए।उसके भगवान को भोग लगाएं।

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