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Showing posts from April, 2022

परंपरागत अंतिम यात्रा और अंतिम संस्कार

                                       मानव जीवन के चार महत्वपूर्ण आश्रम होते है।ब्रह्मचारी, गृहस्थ, वानप्रस्थ एवं सन्यास होते है।शास्त्र के अनुसार चार अधिक महत्वपूर्ण है।मेरे निजी जीवन के अनुसार पांचवा आश्रम मनुष्य की संसार सागर से अलविदा होना होता है। आज महत्वपूर्ण विषय हैं अंतिम यात्रा और अन्तिम संस्कार है।आधुनिक युग में मनुष्य को यह ज्ञान नहीं होता हैं।अन्त काल में क्या क्या कर्म अनिवार्य है। मनुष्य अपनी दिनचर्या में इस बात को भूल जाता हैं कि हमे एक दिन संसार को छोड़कर चले जाना है।शिव लोक ,मोक्षकाल, इस स्थूल शरीर को त्याग कर शिव लोक मोक्षधाम को जाना होगा। भगवान कहते है कि मरणासन्न अवस्था में व्यक्ति को किस कारण से पृथ्वी पर सुलाया जाता हैं। उसके मुख में गंगा जल क्यों डाला जाता है।उसके नीचे कुश और तिल क्यों बिछाये जाते है। मृत्यु के दान एवं गोदान अष्ट महादान करवाया जाना चाहिए।सबसे प्रथम गोबर से भूमि को लीपना चाहिये।तदनन्तर जल की रेखा से मण्डल बनाना चाहिये तथा उसके मुख में गंगाजल डालना च...

गृहस्थ जीवन और सदाचार नियम का पालन करना

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  गृहस्थ जीवन और सदाचार नियम का पालन करना। प्रत्येक व्यक्ति को गृहस्थ जीवन का पालन अवश्य ही करना चाहिए।साधु और साधु वही हो सकता है जिसका दोष न हो।1.  सर्वप्रथम गृहस्थ व्यक्ति को ब्रह्म मुहूर्त में बिस्तर पर से उठ जाना चाहिए।  2. सर्वप्रथम धरती को स्पर्श कर प्रणाम करना चाहिए। 3.उसके बाद अपने हाथों को खोलकर उसके दर्शन करने चाहिए।देवी लक्ष्मी,सरस्वती और श्रीहरि वास करते हैं।4.फिर धरती माता का हाथ जोड़कर प्रणाम करना चाहिए। 5.उसके बाद थोड़ा चल कर मूत्र त्याग,शौच और लघुशंका आदि से निर्वित होने चाहिए।कभी नदी,मन्दिर, तीर्थ स्थल और पेड़ के नीचे , श्मशान घाट की भूमि पर मलमूत्र और शौच का त्याग नही करना चाहिए।निरोगी काया रखने के दिन में मुख के  उत्तर दिशा और रात्रि में दक्षिण दिशा में मुख करके मूत्र त्याग नही करना चाहिए।उसके बाद हाथों को साफ करना चाहिए।तीन बार कुल्ला करना ,मुँह धोये और पैर को भी धोना चाहिए। 6शुद्ध जल में स्नान करना चाहिए। उसके शुद्ध वस्त्र धारण करने के बाद अपने पितरों को और सूर्य देव को जल तर्पण करे। उसके बाद अपने पूजा घर या मंदिर में जा पूजा अर्चना एवं  ध्यान...