परंपरागत अंतिम यात्रा और अंतिम संस्कार
मानव जीवन के चार महत्वपूर्ण आश्रम होते है।ब्रह्मचारी, गृहस्थ, वानप्रस्थ एवं सन्यास होते है।शास्त्र के अनुसार चार अधिक महत्वपूर्ण है।मेरे निजी जीवन के अनुसार पांचवा आश्रम मनुष्य की संसार सागर से अलविदा होना होता है। आज महत्वपूर्ण विषय हैं अंतिम यात्रा और अन्तिम संस्कार है।आधुनिक युग में मनुष्य को यह ज्ञान नहीं होता हैं।अन्त काल में क्या क्या कर्म अनिवार्य है। मनुष्य अपनी दिनचर्या में इस बात को भूल जाता हैं कि हमे एक दिन संसार को छोड़कर चले जाना है।शिव लोक ,मोक्षकाल, इस स्थूल शरीर को त्याग कर शिव लोक मोक्षधाम को जाना होगा। भगवान कहते है कि मरणासन्न अवस्था में व्यक्ति को किस कारण से पृथ्वी पर सुलाया जाता हैं। उसके मुख में गंगा जल क्यों डाला जाता है।उसके नीचे कुश और तिल क्यों बिछाये जाते है। मृत्यु के दान एवं गोदान अष्ट महादान करवाया जाना चाहिए।सबसे प्रथम गोबर से भूमि को लीपना चाहिये।तदनन्तर जल की रेखा से मण्डल बनाना चाहिये तथा उसके मुख में गंगाजल डालना च...